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बिहार पंचायत चुनाव 2026 की तैयारी तेज, निर्वाचन क्षेत्रों की प्रारूप सूची 4 मई को होगी जारी, 5 जून को फाइनल प्रकाशन

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बिहार पंचायत चुनाव 2026 को लेकर निर्वाचन क्षेत्रों की प्रारूप सूची 4 मई को जारी होगी। 18 मई तक दावा-आपत्ति ली जाएगी और 5 जून को अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी। पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से होगी।

पटना/आलम की खबर:बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत और ग्राम कचहरी चुनाव 2026 की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन क्षेत्रों के प्रारूप प्रकाशन की तिथि में बदलाव करते हुए नई समय-सारणी जारी कर दी है, जिससे चुनावी प्रक्रिया एक नए चरण में प्रवेश कर गई है।

आयोग के अनुसार अब निर्वाचन क्षेत्रों की प्रारूप सूची 4 मई को जारी की जाएगी। इससे पहले यह प्रक्रिया किसी अन्य तिथि पर प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे संशोधित कर दिया गया है ताकि सभी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं बेहतर तरीके से पूरी की जा सकें।

प्रारूप सूची जारी होने के बाद आम नागरिकों को 18 मई तक दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। यह चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी दौरान लोग अपने क्षेत्र, वार्ड और जनसंख्या संबंधी त्रुटियों को सुधारने का मौका प्राप्त करते हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में केवल 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों को आधार माना जाएगा। इसी आधार पर दावे और आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की भ्रम या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

आपत्तियों के समाधान के लिए 22 मई तक की समय सीमा निर्धारित की गई है, जिसके बाद अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके बाद 5 जून को निर्वाचन क्षेत्रों की अंतिम सूची प्रकाशित कर दी जाएगी। वहीं गजट प्रकाशन की तिथि 9 मई तय की गई है।

इस बार आयोग ने प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया है। सभी निर्वाचन क्षेत्रों की जानकारी अब डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी और आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर इसे अपलोड किया जाएगा, ताकि आम जनता आसानी से जानकारी प्राप्त कर सके।

प्रारूप प्रकाशन में उन क्षेत्रों को विशेष रूप से चिन्हित किया जाएगा, जो अब नगर निकाय क्षेत्रों में शामिल हो चुके हैं। ऐसे इलाकों की जनसंख्या और वार्ड संरचना को अलग से दर्शाया जाएगा, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

निर्वाचन आयोग ने प्रपत्र-1 के तहत सभी पदों की विस्तृत जानकारी तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, मुखिया, सरपंच, पंचायत सदस्य और पंच जैसे सभी पदों की स्पष्ट जानकारी शामिल होगी। साथ ही संबंधित क्षेत्र की जनसंख्या, वार्ड संख्या और पंचायत विवरण भी अंकित रहेगा।

आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि इस पूरी प्रक्रिया का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इसके लिए हाट-बाजारों में ढोल-नगाड़ा बजाकर, अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से लोगों को जानकारी दी जाएगी, ताकि कोई भी नागरिक इस प्रक्रिया से वंचित न रहे।

आपत्तियों के निपटारे के लिए अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। पंचायत और पंचायत समिति स्तर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि जिला परिषद स्तर पर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को अधिकार दिए गए हैं। अंतिम अपील का अधिकार जिला पदाधिकारी के पास रहेगा।

राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि इस बार पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाया जा रहा है, ताकि पंचायत चुनाव निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। चुनावी तैयारियों के इस चरण को लोकतंत्र की जमीनी मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनाव से पहले होने वाली यह परिसीमन प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसी के आधार पर गांवों और पंचायतों का राजनीतिक ढांचा तय होता है। इससे आने वाले चुनावों की दिशा और स्थानीय नेतृत्व पर भी असर पड़ता है।

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